Skip to main content

Alekh

मुझे एक टुकड़ा चाहिए मेघ का
खिल उठने के लिए
प्राणमय होने के लिए
स्पर्श की स्पर्श पाने के लिए

ज्वल कर राख नहीं हो सकता
हिमालय की सरल वृक्ष की तरह सरलता से
धूप से बेहतर तो बारिश ही है
वहा ले जाता है साथ
हृदय की अपूर्णता को

दोहरता रहता हूँ
आदिपाठ को आदि से
या कह लो
प्रारम्भिक को प्रारम्भ से

मुझे एक टुकड़ा चाहिए मेघ का
उत्सव की उत्सव में
मगन होने के लिए
युग के लिए
युग न खोने के लिए ….

By Alekh

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *